भोपाल। Nishaanebaz.com-BMS Agitation Deferred: मध्य प्रदेश में आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार के मूड में दिख रहे भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने फिलहाल अपना आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई उच्चस्तरीय सकारात्मक चर्चा और मांगों के समाधान के ठोस आश्वासन के बाद यह निर्णय लिया गया है। मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष कुल 79 सूत्रीय मांगें रखी थीं, जिन पर सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए चरणबद्ध तरीके से विभागीय बैठकें आयोजित करने का फैसला किया है।
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उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में बनेगा आउटसोर्स निगम मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए मंडल या निगम (Board / Corporation) का गठन किया जाएगा। इससे निजी ठेका कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी। सरकार ने एक महीने के भीतर सभी प्रमुख मांगों का समाधान तलाशने का आश्वासन दिया है, जिसके चलते 26 अक्टूबर को होने वाला प्रस्तावित आंदोलन टाल दिया गया है।
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27 अक्टूबर से शुरू होगा विभागवार बैठकों का दौर कर्मचारियों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए 27 अक्टूबर से लेकर 17 नवंबर तक विशेष विभागवार बैठकों का शेड्यूल तय किया गया है:
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27 अक्टूबर: स्कूल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग
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2 नवंबर: स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग
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3 नवंबर: पंचायत तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग
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10 नवंबर: कृषि और मछुआ कल्याण विभाग
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13 नवंबर: श्रम विभाग
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16 नवंबर: पीडब्ल्यूडी (PWD), पीएचई (PHE) और ऊर्जा विभाग
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17 नवंबर: परिवहन और राजस्व विभाग
संभागवार और विभागवार होने वाली इन बैठकों में संघ के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर मांगों पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।
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संघ की प्रमुख मांगें जिन पर टिकी हैं निगाहें भारतीय मजदूर संघ ने सरकार के सामने जो मुख्य मांगें रखी हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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निगम का गठन: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में आउटसोर्स निगम या मंडल बनाया जाए ताकि बिचौलियों और ठेकेदारों की मनमानी खत्म हो सके।
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सेवा सुरक्षा और समायोजन: विभागों में लंबे समय से सेवारत आउटसोर्स कर्मचारियों को रिक्त पदों के विरुद्ध स्थाई संविदा में समायोजित किया जाए और 62 वर्ष की उम्र तक सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
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न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण: नियमानुसार हर 5 साल में न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण होना चाहिए, जो वर्ष 2024 से लंबित है। इस पर शासन, नियोक्ता और श्रमिक प्रतिनिधियों की त्रिपक्षीय बैठक बुलाकर नई दरें शीघ्र लागू की जाएं।
सरकार द्वारा सकारात्मक पहल किए जाने के बाद अब कर्मचारियों की नजरें आगामी बैठकों और मिलने वाले परिणामों पर टिकी हुई हैं।
