CG High Court: 10 महीने में तबादला पड़ा भारी? हाई कोर्ट ने सक्ती DPO को दी अंतरिम राहत

Rahul Goshwami

Sakti DPO Transfer: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सक्ती के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुधाकर बोदले के तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता की मौजूदा पदस्थापना को अभी दो साल पूरे नहीं हुए थे। ऐसे में स्थानांतरण नीति के प्रावधानों को देखते हुए उन्हें राहत देना उचित है।मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई।

हाई कोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को जारी तबादला आदेश के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। हालांकि यह राहत फिलहाल केवल सुधाकर बोदले के मामले तक सीमित है।मामला सुधाकर बोदले बनाम छत्तीसगढ़ शासन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन तांबोली ने पक्ष रखा, जबकि शासन की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता के.जी. यादव अदालत में उपस्थित हुए।

याचिका में बताया गया कि सुधाकर बोदले को 7 नवंबर 2025 के आदेश के जरिए जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया था। इसके बाद उनकी पदस्थापना सक्ती जिले में की गई और उन्होंने वहां पदभार संभाला।लेकिन करीब 10 महीने बाद ही 1 सितंबर 2026 को नया तबादला आदेश जारी कर दिया गया। इसमें उन्हें सक्ती के जिला कार्यक्रम अधिकारी पद से हटाकर उप संचालक, क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान, सरगुजा के पद पर भेजा गया।

दो साल की नीति का दिया गया हवाला
सुधाकर बोदले की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि राज्य की स्थानांतरण नीति में सामान्य तौर पर किसी कर्मचारी को वर्तमान पदस्थापना स्थल पर दो साल की अवधि पूरी होने से पहले हटाने का प्रावधान नहीं है।याचिकाकर्ता ने खास तौर पर स्थानांतरण नीति के खंड 3.10 का हवाला दिया। उनका कहना था कि सक्ती में उनकी पदस्थापना 7 नवंबर 2025 को हुई थी, जबकि स्थानांतरण आदेश 1 सितंबर 2026 को जारी किया गया। यानी उन्हें दो साल की निर्धारित अवधि पूरी होने से काफी पहले ही दूसरी जगह भेज दिया गया।
Read More: CG News: रायपुर गोल बाजार में गणेशोत्सव का भव्य आयोजन! गणपति को करोड़ों का मुकुट पहनाकर CM साय ने मांगी छत्तीसगढ़ की खुशहाली

हाई कोर्ट ने आदेश के अमल पर लगाई रोक
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले में प्रथम दृष्टया अंतरिम संरक्षण देना उचित माना। इसके बाद अदालत ने 1 सितंबर 2026 के तबादला आदेश के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।इसका मतलब है कि फिलहाल इस आदेश के आधार पर सुधाकर बोदले को सक्ती के पद से हटाकर सरगुजा भेजने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। हालांकि कोर्ट की यह अंतरिम राहत अंतिम फैसला नहीं है और फिलहाल केवल याचिकाकर्ता के मामले तक सीमित है।

सरकार समेत प्रतिवादियों को नोटिस
हाई कोर्ट ने मामले में संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से प्रतिवादी क्रमांक 1 से 3 की तरफ से नोटिस स्वीकार किया गया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया।वहीं प्रतिवादी क्रमांक 4 को सात दिनों के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। अंतरिम राहत से संबंधित आवेदन पर भी नोटिस जारी किया गया है।

29 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में अब हाई कोर्ट की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी। उस दौरान सरकार और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से जवाब सामने आने के बाद मामले पर आगे सुनवाई होगी।फिलहाल हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सुधाकर बोदले के तबादले पर रोक है। आगे की स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और पक्षकारों के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *