CG High Court: सौतेली मां को भी बेटों से मिलेगा भरण-पोषण, 77 साल की महिला के पक्ष में बड़ा फैसला

Rahul Goshwami

CG High Court: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- बिलासपुर में CG High Court ने भरण-पोषण के अधिकार को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सौतेली मां होने के आधार पर किसी महिला को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने 77 वर्षीय विधवा महिला को राहत देते हुए उसके तीन सौतेले बेटों को हर महीने कुल 9 हजार रुपये भरण-पोषण के तौर पर देने का आदेश दिया है। यानी तीनों बेटों को अलग-अलग 3-3 हजार रुपये प्रतिमाह देने होंगे।यह आदेश चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने दिया है।

सौतेली मां भरण-पोषण अधिकार से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि महिला के बच्चे सौतेले हैं, सिर्फ इस वजह से उसे कानूनी रूप से मिलने वाले भरण-पोषण के अधिकार से बाहर नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का भी उल्लेख किया। उसके अनुसार, ऐसी संतानहीन और विधवा सौतेली मां जो खुद अपना खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है, उपयुक्त परिस्थितियों में अपने सौतेले बेटों से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।हाईकोर्ट ने इसी आधार पर बिलासपुर फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया।

फैमिली कोर्ट ने पहले खारिज कर दिया था आवेदन
मामला बिलासपुर निवासी 77 वर्षीय सनकैया बाई से जुड़ा है। महिला ने अपने दिवंगत पति पुरुषोत्तम सोनी के तीन बेटों—भीषण प्रसाद उर्फ गोवर्धन सोनी, लोचन प्रसाद सोनी और दीपक प्रसाद सोनी—के खिलाफ भरण-पोषण की मांग की थी।महिला के पति की वर्ष 2021 में मृत्यु हो गई थी। उनका कहना था कि पति के निधन के बाद तीनों सौतेले बेटों ने उनकी देखभाल करना बंद कर दिया।उन्होंने खुद को संतानहीन बताते हुए कहा था कि उनके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है और वह अपने खर्च का इंतजाम करने में सक्षम नहीं हैं।बिलासपुर फैमिली कोर्ट ने 5 अप्रैल 2025 को उनका भरण-पोषण आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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बचपन से तीनों बेटों की देखभाल का दावा
Stepmother Maintenance Rights से जुड़े इस मामले में महिला ने फैमिली कोर्ट के सामने बताया था कि तीनों सौतेले बेटे बचपन से उनके साथ रहते थे।महिला के मुताबिक, उसने बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पति के जीवित रहने तक तीनों बेटे उनकी देखभाल भी करते थे, लेकिन पति की मृत्यु के बाद उनका व्यवहार बदल गया।महिला ने यह भी दावा किया कि परिवार की कृषि भूमि से तीनों बेटे आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कुछ कृषि भूमि को अपनी और अपने पति की संपत्ति बताते हुए राजस्व रिकॉर्ड समेत कई दस्तावेज कोर्ट में पेश किए थे।

कोर्ट में नहीं पहुंचे तीनों सौतेले बेटे
मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने तीनों बेटों को नोटिस जारी किया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।हाईकोर्ट में भी नोटिस की तामील होने के बावजूद तीनों बेटे अदालत के सामने पेश नहीं हुए।इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने 77 वर्षीय विधवा महिला को राहत दी और फैमिली कोर्ट के 5 अप्रैल 2025 के आदेश को निरस्त कर दिया।

इसी महीने से देना होगा ₹3-₹3 हजार
सौतेली मां के भरण-पोषण के फैसले के तहत हाईकोर्ट ने तीनों बेटों को महिला को हर महीने 3-3 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है।इस तरह महिला को तीनों बेटों से कुल 9 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। कोर्ट के निर्देश के अनुसार यह भुगतान इसी महीने से किया जाना है।फैसले ने यह स्पष्ट किया है कि किसी विधवा और असहाय सौतेली मां के भरण-पोषण के दावे पर केवल रिश्ते में ‘सौतेली’ होने के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती। मामले में लागू कानूनी परिस्थितियों और महिला की जरूरत को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है।

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