Student Protest FIR Cancellation: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में मंगलवार को बड़ा फैसला सामने आया। दिल्ली समेत चार राज्यों में दर्ज 129 FIR रद्द कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर को इन मामलों को खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी।सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आंदोलन खत्म कराने के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का वादा किया गया था। अब सरकार ने इस वादे को पूरा करने की बात कही है।
छात्र आंदोलन की 129 FIR रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब इन मामलों में आगे कार्रवाई नहीं होगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ये FIR अब इतिहास हैं।कोर्ट के इस आदेश के बाद इन मामलों में जांच या आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता बंद हो गया है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को खत्म करने की मांग की गई थी।
दिल्ली के साथ इन राज्यों में भी दर्ज थे केस
छात्र प्रदर्शन FIR मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था। बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल में भी प्रदर्शन से जुड़े केस दर्ज किए गए थे।केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 25 जुलाई को आंदोलन खत्म करने के दौरान केस वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद राज्यों ने भी अपने यहां दर्ज मामलों को खत्म करने के लिए आवेदन किया।
Supreme Court quashes all FIRs linked to student protests in Delhi and other parts of the country. pic.twitter.com/TAWsNiIyCu
— ANI (@ANI) September 1, 2026
अनुच्छेद 142 के तहत लिया गया फैसला
129 FIR रद्द होने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत लिया। इस प्रावधान के जरिए कोर्ट किसी मामले में पूरा न्याय करने के लिए विशेष आदेश जारी कर सकता है।सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि अगर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामले किसी दूसरे राज्य में भी दर्ज हैं, तो वहां भी जांच को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
Read More: Car Price Hike: सितंबर के पहले दिन बड़ा झटका, Tata और Hyundai की कारें हुईं महंगी
2873 लोगों को लेकर अलग FIR का मुद्दा
छात्र आंदोलन केस में नया मोड़ उस समय आया जब दिल्ली पुलिस की ओर से 2873 लोगों से जुड़ी एक नई FIR का मुद्दा सामने आया। इस मामले में शारीरिक चोट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों की बात कही गई।कई वकीलों ने इस नई FIR का विरोध किया। उनका कहना था कि 2873 लोगों की पूरी जानकारी अदालत के सामने रखी जानी चाहिए, ताकि मामले की स्थिति साफ हो सके।
नई FIR को लेकर कोर्ट में हुई चर्चा
छात्रों पर दर्ज नए केस को लेकर सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि पुराने मामलों को खत्म करने के बाद क्या नई FIR के जरिए कार्रवाई की जा सकती है।सॉलिसिटर जनरल ने इस मामले में सरकार का पक्ष रखा। कोर्ट ने भी आदेश के संबंधित हिस्से को स्पष्ट करने पर जोर दिया, ताकि पुराने मामलों को खत्म करने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर कोई भ्रम न रहे।
मुआवजे पर सरकार ने मांगा 3 महीने का समय
छात्र आंदोलन में मुआवजे का मुद्दा भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने उन छात्रों के मुआवजे के बारे में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिनकी आंदोलन के दौरान मौत हुई थी।सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर कुछ तौर-तरीके तय किए जाने बाकी हैं। इसके लिए केंद्र ने तीन महीने का समय मांगा है।
5 सितंबर का मार्च भी हुआ रद्द
छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को रद्द करने का फैसला लिया है।129 FIR वापस होने के बाद आंदोलन से जुड़े पक्षों के बीच एक बड़ा विवाद फिलहाल खत्म होता दिखाई दे रहा है। हालांकि मुआवजे और 2873 लोगों से जुड़ी नई FIR जैसे मुद्दों पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
छात्र आंदोलन की FIR रद्द होने के बाद इन 129 मामलों में आगे कार्रवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया है और पुराने मामलों को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया है।वहीं, मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर अगले तीन महीनों में सरकार की ओर से तौर-तरीके तय किए जाने हैं। ऐसे में इस मामले में अगला बड़ा अपडेट मुआवजे और नई FIR से जुड़ा हो सकता है।





