ट्रैक्टर वारंटी नियम के मुताबिक वारंटी का मतलब यह नहीं है कि ट्रैक्टर में आने वाली हर खराबी का खर्च कंपनी उठाएगी। वारंटी के लिए कंपनी की कुछ तय शर्तें होती हैं।इन शर्तों में वारंटी की अवधि, ट्रैक्टर के इस्तेमाल का तरीका, सर्विस रिकॉर्ड और खराब हुए पार्ट की स्थिति जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। इसलिए खरीदारी के समय वारंटी बुक और नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
कंपनी और मॉडल के हिसाब से बदलती है वारंटी
ट्रैक्टर वारंटी नियम हर कंपनी और मॉडल के लिए एक जैसे नहीं होते। किसी ट्रैक्टर पर ज्यादा साल की वारंटी मिल सकती है, जबकि दूसरे मॉडल में समय या काम करने के घंटों की सीमा अलग हो सकती है।इसका मतलब है कि केवल सेल्समैन की बताई वारंटी अवधि पर भरोसा करने के बजाय किसान को कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज में दी गई शर्तों की जांच करनी चाहिए।
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जॉन डियर देता है 5 साल या 5000 घंटे की वारंटी
ट्रैक्टर वारंटी नियम की बात करें तो जॉन डियर इंडिया अपने ट्रैक्टरों पर कुछ शर्तों के तहत 5 साल या 5000 घंटे, जो भी पहले पूरा हो, की व्यापक वारंटी देता है।इस तरह अगर ट्रैक्टर 5 साल पूरे होने से पहले 5000 घंटे का इस्तेमाल कर लेता है, तो वारंटी की सीमा घंटे के आधार पर पूरी हो सकती है। इसी तरह समय और घंटे की सीमा को समझना किसान के लिए महत्वपूर्ण है।
न्यू हॉलैंड में 6 साल या 6000 घंटे का कवरेज
ट्रैक्टर वारंटी नियम के तहत न्यू हॉलैंड इंडिया कई ट्रैक्टर मॉडल पर 6 साल या 6000 घंटे, जो भी पहले हो, की ट्रांसफरेबल वारंटी देता है। हालांकि सभी मॉडल इस वारंटी के दायरे में शामिल नहीं होते।इसलिए ट्रैक्टर खरीदते समय मॉडल के हिसाब से वारंटी की जानकारी लेना जरूरी है। एक ही कंपनी के अलग-अलग मॉडल में भी नियम अलग हो सकते हैं।
इंजन और ट्रांसमिशन जैसे पार्ट हो सकते हैं शामिल
ट्रैक्टर वारंटी नियम के तहत आम तौर पर निर्माण से जुड़ी खराबी को वारंटी में शामिल किया जाता है। कंपनी और मॉडल के आधार पर इंजन, ट्रांसमिशन, हाइड्रोलिक सिस्टम और दूसरे प्रमुख हिस्सों का कवरेज मिल सकता है।हालांकि हर कंपनी की शर्त अलग होती है। कुछ कंपनियां पूरी वारंटी अवधि में पूरे ट्रैक्टर को कवर करती हैं, जबकि कुछ मामलों में शुरुआती अवधि के बाद केवल प्रमुख हिस्सों पर वारंटी जारी रहती है।
सर्विस रिकॉर्ड रखना भी जरूरी
ट्रैक्टर वारंटी नियम समझने के साथ किसान को नियमित सर्विस का रिकॉर्ड भी संभालकर रखना चाहिए। कई कंपनियों की वारंटी में तय समय पर सर्विस कराने की शर्त होती है।अगर ट्रैक्टर की सर्विस कंपनी के तय नियमों के अनुसार नहीं कराई गई, तो कुछ परिस्थितियों में वारंटी का लाभ प्रभावित हो सकता है। इसलिए सर्विस बुक, बिल और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहतर है।
खरीदते समय इन बातों की जरूर करें जांच
ट्रैक्टर वारंटी नियम समझते समय किसान को सिर्फ वारंटी की अवधि नहीं देखनी चाहिए। यह भी पता करना चाहिए कि कौन-कौन से पार्ट कवर हैं, कौन से पार्ट वारंटी से बाहर हैं और वारंटी का लाभ लेने के लिए किन शर्तों का पालन करना होगा।साथ ही यह भी पूछें कि वारंटी दूसरे खरीदार को ट्रांसफर हो सकती है या नहीं। अगर भविष्य में ट्रैक्टर बेचने की योजना हो, तो यह जानकारी काफी काम आ सकती है।
वारंटी की शर्तें समझकर ही करें खरीदारी
ट्रैक्टर वारंटी नियम की सही जानकारी किसान को भविष्य के अनावश्यक खर्च से बचा सकती है। नया ट्रैक्टर खरीदते समय कीमत और फीचर्स के साथ वारंटी को भी खरीदारी का अहम हिस्सा मानना चाहिए।अंतिम फैसला लेने से पहले कंपनी के आधिकारिक वारंटी दस्तावेज को पढ़ें और डीलर से लिखित जानकारी लें। इससे बाद में किसी खराबी की स्थिति में वारंटी को लेकर भ्रम या विवाद की संभावना कम हो सकती है।