सूरजपुर ब्यूरो [Nishanebaaz News]। Surajpur Chhatarang Ashram Negligence News के तहत छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शासकीय आश्रम शालाओं की बदहाली और बच्चों की सुरक्षा में घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। जिले के प्रतापपुर/सूरजपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छतरंग स्थित शासकीय बालक आश्रम में बच्चों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। औचक निरीक्षण के दौरान आश्रम में दर्ज कुल 48 बच्चों में से महज 16 बच्चे ही उपस्थित पाए गए, जबकि शेष 32 बच्चों की अनुपस्थिति पर प्रबंधन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।
इसके अलावा आश्रम अधीक्षक की नियमित मौजूदगी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
तालाब के बदबूदार व गंदे पानी में नहाने को मजबूर मासूम
मामले को बेहद गंभीर और संवेदनशील बनाने वाला एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वायरल वीडियो में आश्रम के मासूम बच्चे मजबूरी में पास के तालाब के गंदे और दूषित पानी में नहाते हुए साफ नजर आ रहे हैं।
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स्वास्थ्य पर खतरा: दूषित पानी के इस्तेमाल से बच्चों के बीच त्वचा रोग, हैजा और अन्य गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बन गया है।
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हादसे की आशंका: बिना किसी देखरेख के गहरे तालाब में बच्चों के उतरने से किसी बड़े डूबने के हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

न बेड, न मच्छरदानी और न साफ पेयजल: बुनियादी सुविधाओं का अकाल
निरीक्षण के दौरान आश्रम परिसर में अव्यवस्थाओं का अंबार देखने को मिला।
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आश्रम में बच्चों को जहरीले मच्छरों व कीट-पतंगों से बचाने के लिए पर्याप्त मच्छरदानियों की व्यवस्था नहीं है।
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सोने के लिए बेड, गद्दे और पीने के लिए सुरक्षित व शुद्ध पेयजल जैसी अति-आवश्यक सुविधाओं का सर्वथा अभाव पाया गया है।
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स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि आश्रम अधीक्षक अधिकांश समय कर्तव्य से नदारद रहते हैं, जिसके कारण संस्था की प्रशासनिक व्यवस्था और बच्चों की देखरेख पूरी तरह रामभरोसे चल रही है।
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सरपंच ने कलेक्टर से की लिखित शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
छतरंग के स्थानीय सरपंच सुभाष सिंह मरकाम ने आश्रम की इस बदहाल स्थिति पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने सूरजपुर कलेक्टर के नाम लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने की मांग की है।
सरपंच ने कहा कि शासकीय आश्रमों में बच्चों के पोषण और सुरक्षा के नाम पर आने वाले बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस सनसनीखेज लापरवाही पर क्या कड़े कदम उठाता है।





