Tuesday, August 25, 2026
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CG PM Awas Fraud: 48 मृतकों को बनाया हितग्राही, सरकारी पैसे के खेल में सचिव पर गिरी गाज

CG Korba PM Awas Fraud

Korba PM Awas Yojana Fraud: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की एक ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। तिलकेजा ग्राम पंचायत में 48 लोगों के नाम पर पीएम आवास योजना की राशि जारी होने की शिकायत की गई है। शिकायत में दावा किया गया कि इन नामों में मृत लोग भी शामिल थे और योजना की रकम के गलत इस्तेमाल की आशंका है।मामले की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पंचायत सचिव नविता दुबे पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने और कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देने का आरोप लगा। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। Korba PM Awas Yojana Fraud मामले में पंचायत के खिलाफ एफआईआर की तैयारी भी की जा रही है।

यह मामला जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत आने वाली तिलकेजा ग्राम पंचायत का है। शिकायत में 48 लोगों के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जारी कराने में कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया था।शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिए टीम बनाई। Korba PM Awas Yojana Fraud की जांच में अब बैंक खातों और पंचायत रिकॉर्ड समेत कई दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।

RTI कार्यकर्ता की शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
मामले की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र साहू ने की थी। शिकायत में 48 लोगों के नाम से कथित फर्जीवाड़ा कर पीएम आवास योजना की राशि जारी कराने और उसके गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, आईएएस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए अधिकारियों की टीम गठित की। इसके बाद पंचायत से जुड़े रिकॉर्ड और योजना के हितग्राहियों के खातों से संबंधित जानकारी जुटाई गई। Korba PM Awas Yojana Fraud में जांच टीम अब उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी है।
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बैंक खातों से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र तक मांगे गए रिकॉर्ड
जांच टीम ने सरपंच और पंचायत सचिव से कई जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। इनमें 48 हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी गई राशि से जुड़े रिकॉर्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक के पहले पन्ने और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज शामिल थे।प्रशासन ने दोनों को 13 अगस्त 2026 को उप संचालक पंचायत, जिला कोरबा के कार्यालय में उपस्थित होकर रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे। लेकिन निर्धारित समय पर सरपंच और सचिव के उपस्थित नहीं होने की बात सामने आई। Korba PM Awas Yojana Fraud की जांच में दस्तावेजों की उपलब्धता बेहद अहम मानी जा रही है।

नोटिस का जवाब नहीं दिया, फिर सचिव पर कार्रवाई
जांच के दौरान पंचायत सचिव नविता दुबे को अलग से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्हें तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया था।प्रशासन के अनुसार, सचिव ने तय समय में नोटिस का जवाब नहीं दिया। साथ ही जांच में भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया। अधिकारियों ने इसे शासकीय कार्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता माना। इसके बाद Korba PM Awas Yojana Fraud मामले में सचिव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

पंचायत सचिव को नियमों के तहत किया गया निलंबित
आदेश में पंचायत सचिव नविता दुबे का कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा आचरण नियम, 1998 के विपरीत पाए जाने का उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा अनुशासन तथा अपील नियम, 1999 के तहत उन्हें निलंबित किया गया।निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जनपद पंचायत कोरबा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी मिलेगा। Korba PM Awas Yojana Fraud की जांच पूरी होने तक संबंधित विभागीय प्रक्रिया जारी रहेगी।

एक अधिकारी को भी पंचायत से हटाया गया
मामले में सिर्फ पंचायत सचिव पर ही कार्रवाई नहीं हुई है। विकासखंड समन्वयक देवानंद श्रीवास को भी तिलकेजा पंचायत से हटाकर जनपद पंचायत में अटैच किया गया है।प्रशासन अब योजना से जुड़े दस्तावेजों और बैंक खातों की जानकारी की जांच करेगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कथित फर्जी हितग्राहियों के नाम पर कितनी राशि जारी हुई और वह किन खातों में पहुंची। Korba PM Awas Yojana Fraud की पूरी तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।

जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल सचिव को जांच में सहयोग नहीं करने और नोटिस का जवाब नहीं देने के आधार पर निलंबित किया गया है। वहीं पंचायत के खिलाफ एफआईआर की तैयारी की जानकारी सामने आई है।अब जांच टीम बैंक रिकॉर्ड, आधार कार्ड, पासबुक, पंचायत दस्तावेज और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले की जांच करेगी। अगर सरकारी राशि के दुरुपयोग या अन्य गंभीर अनियमितता की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।

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