Sunday, August 23, 2026
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Singrauli News: 57 लाख के वाटर एटीएम बदहाल, जनता प्यासी उपकरण चोरी ने नगर निगम की निगरानी पर उठाए सवाल

[nishaanebaz.com ]  Singrauli News: सिंगरौली जिले में नगर निगम क्षेत्र में आम जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए वाटर एटीएम अब खुद व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। करीब 57 लाख रुपये की लागत से स्थापित किए गए वाटर एटीएम नियमित रूप से जनता को सुविधा नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, इनके संचालन, रखरखाव और भुगतान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में कुल तीन स्थानों पर वाटर एटीएम लगाए गए हैं। इनमें फल मंडी मोरवा, शहरी तहसील परिसर और वार्ड क्रमांक 40 स्थित मल्हार पार्क के सामने चौपाटी क्षेत्र शामिल हैं। लेकिन आरोप है कि इनमें से अधिकांश वाटर एटीएम लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं।

चौपाटी में वाटर एटीएम बदहाल उपकरण चोरी का प्रयासवार्ड क्रमांक 40 स्थित चौपाटी में लगाए गए वाटर एटीएम की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां लगा वाटर एटीएम लंबे समय से उपयोग में नहीं आया और अब इसके उपकरणों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा वाटर एटीएम के उपकरणों को तोड़ने और चोरी करने का प्रयास किया गया। मशीन का दरवाजा टूटा हुआ पाया गया और बाहर की ओर पड़ा मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, उसका शुद्ध पानी लोगों को कभी नियमित रूप से नसीब नहीं हुआ।

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मेंटेनेंस भुगतान पर भी उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वाटर एटीएम जनता को अपेक्षित सुविधा नहीं दे पाए तो इनके रखरखाव और मेंटेनेंस के नाम पर होने वाले खर्च का आधार क्या रहा? नगर निगम द्वारा इन योजनाओं पर हुए वास्तविक खर्च, संचालन व्यवस्था और भुगतान का पूरा विवरण सामने नहीं आने से चर्चाओं का दौर जारी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता के पैसे से स्थापित सुविधाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। यदि मशीनें बंद हैं तो उनकी मरम्मत, सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

पार्षद ने भी उठाए सवाल

वार्ड क्रमांक 40 के पार्षद का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च कर वाटर एटीएम लगाए गए, लेकिन यदि जनता को सुविधा ही नहीं मिल रही तो इस योजना की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि वाटर एटीएम लगाए जाने से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी जानकारी दी जानी चाहिए थी और इसकी गुणवत्ता एवं संचालन व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।

स्मार्ट टॉयलेट भी बने सफेद हाथी

वाटर एटीएम के साथ ही वार्ड क्रमांक 40 में लगाए गए स्मार्ट टॉयलेट भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। न्यायालय परिसर के समीप लगाया गया स्मार्ट टॉयलेट हटाया जा चुका है, जबकि राजमाता चूनकुमारी स्टेडियम के मुख्य द्वार के सामने स्थापित स्मार्ट टॉयलेट भी अपेक्षित उपयोग में नहीं आ रहा है।

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जनता के पैसे का हिसाब कब?

नगर निगम द्वारा जनता की सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि योजनाएं धरातल पर उपयोगी साबित नहीं हो पा रही हैं तो उनकी समीक्षा जरूरी है। अब सवाल यह है कि 57 लाख रुपये की लागत से लगाए गए वाटर एटीएम का वास्तविक लाभ जनता को कब मिलेगा? इनके रखरखाव पर कितना खर्च हुआ, उपकरण चोरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए और बंद पड़ी सुविधाओं को दोबारा शुरू करने की क्या योजना है—इन सभी सवालों का जवाब नगर निगम को देना होगा।

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