मऊगंज/नईगढ़ी [Nishanebaaz News]। मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले के नईगढ़ी कस्बे में कुदरत के कहर से ज्यादा प्रशासनिक बेरुखी और लापरवाही आम जनता पर भारी पड़ रही है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नईगढ़ी नगर पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। घर डूब रहे हैं, दीवारें ढह रही हैं और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर हैं। इस बीच अष्टभुजा नदी के पास से प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक ऐसी भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टीन शेड बचाने के चक्कर में तेज बहाव में फंसा मजदूर
अमृत योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य में ठेकेदार ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मजदूरों को एक असुरक्षित निर्माणाधीन भवन में ठहराया था। सुबह जब नदी में जलस्तर अचानक बढ़ा, तो अपनी रोजी-रोटी और सामान का टीन शेड (शीट) बचाने की कोशिश में गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला एक गरीब मजदूर उफनती नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गया।
मऊगंज: नईगढ़ी में उफनती नदी में 2 घंटे तक जिंदगी से जंग लड़ता मजदूर तेज बहाव में बहा, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल।#Mauganj #MPNews #MPRain pic.twitter.com/kqglxTEze7
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) August 20, 2026
पानी के प्रचंड वेग के बीच मजदूर ने किसी तरह एक बड़े पत्थर को पकड़ लिया और लगातार 2 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ता रहा। पुलिया पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा थी, लेकिन उफान इतना खतरनाक था कि बिना रेस्क्यू उपकरणों के कोई पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
12 किलोमीटर दूर पहुंचने में लगे घंटे, एसी गाड़ियों में बैठे रहे जिम्मेदार
हैरानी की बात यह है कि मऊगंज जिला मुख्यालय से नईगढ़ी की दूरी महज 12 किलोमीटर है, लेकिन सूचना मिलने के बावजूद प्रशासनिक अमले, एसडीएम और पुलिस टीम को मौके पर पहुंचने में घंटों लग गए।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारी सरकारी गाड़ियों के शीशे चढ़ाकर तमाशबीन बने रहे। जब मीडियाकर्मियों के कैमरे अधिकारियों की तरफ घूमे, तो गाड़ियों के चालक वाहन आगे बढ़ाकर वहां से रवाना हो गए। समय पर न तो SDRF की टीम पहुंची और न ही NDRF का कोई अता-पता था। आखिरकार, 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाता हुआ वह बेबस मजदूर तेज धारा में बह गया, जिसका घंटों बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है।
नईगढ़ी में बाढ़ का तांडव: तहसील और छात्रावासों में घुसा पानी
नईगढ़ी नगर के कई वार्ड पूरी तरह डूब चुके हैं। तहसील कार्यालय से लेकर दो शासकीय छात्रावासों तक में पानी भर गया है। इसके अलावा, एक अन्य निर्माणाधीन भवन की छत पर सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक 3 मजदूर जान बचाने के लिए भूखे-प्यासे फंसे रहे।
मौसम विभाग द्वारा पूर्व में जारी की गई भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद जिला प्रशासन का आपदा प्रबंधन तंत्र धरातल पर पूरी तरह पूरी तरह ध्वस्त नजर आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार की लापरवाही और प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण एक निर्दोष मजदूर की जान जोखिम में पड़ी है।
“हम अपनी आंखों के सामने उसे 2 घंटे तक चिल्लाते देखते रहे। उफान बहुत तेज था, कोई मदद नहीं कर सका। अगर पुलिस या रेस्क्यू टीम 1 घंटे पहले भी आ जाती, तो उसकी जान बच सकती थी।”
— सर्फराज (प्रत्यक्षदर्शी)
“निर्माणाधीन स्थल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऐसे संवेदनशील इलाके में ठहराया गया था।”
— शौर्य पांडेय (इंजीनियर)





