रायपुर [Nishanebaaz News] PCC Chief Deepak Baij Attack। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर शिक्षा, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और धान खरीदी सहित कई ज्वलंत विषयों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
शिक्षा प्रणाली की जर्जर स्थिति पर उठाए सवाल विद्यालयीन व्यवस्था पर बात करते हुए Deepak Baij On Education System के अंतर्गत उन्होंने स्पष्ट किया कि कई अंचलों में अध्ययन केंद्र जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। धमतरी में शिक्षकों के अभाव में तालाबंदी और धमधा सहित बस्तर के पंचायत भवनों में कक्षाएं लगने का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय प्रमुख सोशल मीडिया में व्यस्त हैं, जिससे अध्ययनरत विद्यार्थियों को गणवेश और पाठ्यपुस्तकें तक समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
कानून-व्यवस्था एवं पुलिसिंग पर साधा निशाना राजधानी की सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए Congress Target On BJP Government के तहत उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों की श्रृंखला से प्रदेश में भय का वातावरण निर्मित हो रहा है। बैज ने दावा किया कि लागू की गई नई व्यवस्थाएं धरातल पर प्रभावहीन सिद्ध हुई हैं और जिम्मेदार अधिकारी केवल प्रचार-प्रसार में सीमित हैं, जिससे आपराधिक आंकड़ों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है।
स्वास्थ्य महकमे एवं अमानक दवा खरीदी का मुद्दा चिकित्सा सेवाओं पर टिप्पणी करते हुए Deepak Baij Press Conference Raipur के माध्यम से उन्होंने बस्तर क्षेत्र में मौसमी बीमारियों से हो रही जनहानि पर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिबंधित संस्थाओं से अमानक एवं निम्नस्तरीय औषधियों के क्रय का आरोप लगाते हुए विभागीय मंत्री से सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण और जवाबदेही तय करने की मांग रखी।
धान खरीदी निरीक्षण एवं संगठन पर टिप्पणी कृषि और उपज संग्रहण पर अपनी बात रखते हुए Chhattisgarh Rice Procurement Allegation के क्रम में उन्होंने बताया कि कांग्रेस की जांच टीम राज्य के विभिन्न उपार्जन एवं संग्रहण स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि खुले में रखे अनाज के प्रबंधन में व्यापक अनियमितताएं बरती जा रही हैं। अंत में, सत्ताधारी दल में संगठनात्मक पद की रिक्ति का संदर्भ देते हुए उन्होंने तंज कसा कि मार्गदर्शक के बिना प्रशासनिक निर्णय दिशाहीन साबित हो रहे हैं।





