What is Ata Sata Custom: क्या है राजस्थान की ‘आटा-साटा’ प्रथा? जिसके चलते जोधपुर में एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया

What is Ata Sata Custom: जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने समाज में आज भी जड़ जमाए बैठी रूढ़िवादी और अमानवीय कुरीतियों को उजागर कर दिया है। यहाँ लंबे समय से विवादों में रही ‘आटा-साटा’ प्रथा के चलते एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। पीड़ित युवक प्रमोद प्रजापत ने अपने ससुर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद से प्रदेश में इस कुप्रथा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

डेढ़ साल तक रहा सब ठीक, फिर अचानक पहुंचे ससुर

जानकारी के अनुसार, जोधपुर निवासी प्रमोद प्रजापत का विवाह नवंबर 2023 में लीला नाम की युवती से हुआ था। शादी के बाद करीब डेढ़ साल तक दोनों के बीच सब कुछ सामान्य और खुशहाल रहा। लेकिन पिछले साल जुलाई 2025 में अचानक पीड़ित के ससुर पोकरराम उनके घर पहुंचे और ‘आटा-साटा’ प्रथा का हवाला देते हुए अजीबोगरीब शर्त रख दी। ससुर ने दामाद के सामने मांग रखी कि या तो वे समझौते के तहत अपने साले की शादी के लिए लड़की का इंतजाम करें, या फिर इसके बदले ₹15 लाख नकद दें।

शर्त पूरी न होने पर बेटी को ले गए साथ, फरवरी में करा दी दूसरी शादी

जब पीड़ित प्रमोद ने ऐसी किसी भी शर्त या सौदेबाजी से इनकार किया, तो ससुर ने धमकी दी कि वह अपनी बेटी लीला को वापस ले जाएगा और उसकी शादी कहीं और करा देगा। इसके बाद ससुर अपनी बेटी को साथ ले गया। पीड़ित परिवार ने जब भी लीला को वापस भेजने की गुहार लगाई, तो हर बार ₹15 लाख की मांग दोहराई गई। हद तो तब हो गई जब मांग पूरी न होने पर ससुर ने इसी साल फरवरी (2026) में लीला की शादी जबरन किसी अन्य युवक से करा दी। इस धोखे और प्रताड़ना के बाद पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है ‘आटा-साटा’ प्रथा?

‘आटा-साटा’ (अट्टा-सट्टा) मुख्य रूप से राजस्थान और उत्तर भारत के कुछ ग्रामीण इलाकों में प्रचलित एक बेहद गंभीर सामाजिक कुरीति है। सरल शब्दों में, यह ‘बेटियों की अदला-बदली’ का एक वैवाहिक सौदा है। इस प्रथा के तहत एक परिवार अपने बेटे की शादी जिस दूसरे परिवार की बेटी से करता है, बदले में उसे अपने घर की किसी बेटी या बहन की शादी भी उसी दूसरे परिवार के बेटे से करनी पड़ती है।

अक्सर इस प्रथा के कारण बेमेल शादियां होती हैं और यदि एक भी रिश्ता टूटता है, तो उसका खामियाजा दूसरे निर्दोष जोड़े को भुगतना पड़ता है। इस प्रथा को लेकर अदालत (कोर्ट) भी सख्त रुख अपना चुकी है। न्यायालय का स्पष्ट कहना है कि किसी भी बेटी को वैवाहिक सौदेबाजी का माध्यम नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि यह पूरी तरह से बाल अधिकारों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। फिलहाल, जोधपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर इस पर गहन जांच शुरू कर दी है।

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