School Education CG: गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी एक अत्यंत कड़े और ऐतिहासिक आदेश के बाद रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड शिक्षा विभाग में प्रशासनिक हड़कंप मच गया है। संचालनालय द्वारा 25 जून 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के तहत राज्य के विभिन्न कार्यालयों, गैर-शिक्षण कार्यों और मलाईदार सीटों पर वर्षों से अवैध या नियमों के विपरीत संलग्न (अटैच) कर्मचारियों और शिक्षकों की कुंडली खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्कूल शिक्षा मंत्री की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मिले सख्त निर्देशों के बाद, अब सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को अपने-अपने नियंत्रण वाले कार्यालयों में अटैच किए गए अमले की पूरी तथ्यात्मक जानकारी अविलंब संचालनालय को भेजने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
मूल पदस्थापना पर तत्काल लौटने के निर्देश, जुगाड़ू संलग्नीकरण व्यवस्था होगी ध्वस्त
आदेश के मुख्य प्रारूप के अनुसार, जिन भी शिक्षकों और विभागीय लिपिकीय कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना (जहां के लिए वे शासकीय रूप से नियुक्त हैं) से हटाकर अन्य सुविधायुक्त कार्यालयों या चहेते स्थानों पर अटैच किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके मूल संस्थान के लिए कार्यमुक्त (रिलीव) करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
संचालनालय ने साफ किया है कि किस कर्मचारी को किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत, किस दिनांक को और किस विशेष प्रयोजन से संलग्न किया गया था, इसकी एक-एक बिंदुवार सूची तैयार कर जमा करनी होगी। इस कड़े रुख से उन रसूखदार शिक्षकों और कर्मचारियों में हड़कंप व्याप्त है जो ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय शहरों और कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे थे।
घरघोड़ा BEO कार्यालय के रिकॉर्ड पर टिकीं अंचल की निगाहें
इस पूरे प्रशासनिक फेरबदल और कार्रवाई के बीच अब सबसे ज्यादा चर्चा और निगाहें घरघोड़ा विकासखंड शिक्षा कार्यालय (BEO) पर टिक गई हैं। लंबे समय से यह जन-चर्चा और शिकायतें सामने आ रही थीं कि घरघोड़ा ब्लॉक के कई शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक अपनी मूल शालाओं से नदारद रहकर विभागीय साठगांठ के चलते कार्यालयीन कार्यों या अन्य सुगम स्थानों पर जमे हुए हैं।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि संचालनालय के इस कड़े हंटर के बाद घरघोड़ा बीईओ कार्यालय शासन को भेजी जाने वाली सूची में पारदर्शिता बरतता है या रसूखदारों को बचाने के लिए लीपापोती का प्रयास किया जाता है।
“RTI के अचूक अस्त्र से बाहर आएगी असलियत”— जागरूक नागरिकों की तैयारी
विभागीय सूत्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मत है कि इस पूरे मामले की वास्तविक और निष्पक्ष तस्वीर केवल शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट से साफ नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) का सहारा लिया जा रहा है। जागरूक नागरिकों द्वारा घरघोड़ा बीईओ कार्यालय में आरटीआई के तहत आवेदन लगाकर निम्नलिखित पांच प्रमुख बिंदुओं पर आधिकारिक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं:
- विकासखंड में कुल कितने कर्मचारी और शिक्षक मूल पदस्थापना से अलग संलग्न थे?
- इन कर्मचारियों को किस सक्षम अधिकारी के आदेश और वित्तीय नियमों के आधार पर अटैच किया गया?
- ये कर्मचारी और शिक्षक कुल कितने वर्षों/महीनों से अपनी मूल शालाओं से बाहर थे?
- क्या संचालनालय के ताजा आदेश के बाद सभी को वास्तव में धरातल पर मूल संस्थाओं में कार्यमुक्त कर दिया गया है?
- शासन को भेजी गई वर्तमान सूची और क्षेत्र के स्कूलों की वास्तविक हाजिरी पंजी में कोई विसंगति तो नहीं?
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि आरटीआई से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों और शासन को भेजी गई विभागीय रिपोर्ट में किसी भी प्रकार का अंतर या हेरफेर पाया जाता है, तो यह गंभीर धोखाधड़ी और प्रशासनिक कदाचरण की श्रेणी में आएगा, जिसके तहत दोषी अधिकारियों पर सीधे दंडात्मक कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल, घरघोड़ा शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही इस अवांछित अटैचमेंट व्यवस्था पर से पर्दा उठने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।







