Kukru Ecotourism: कुकरू में अध्यात्म और विकास: सनराइज और बुच पॉइंट पर ध्यान लगाने के साथ ‘मन की बात’ सुनेंगे सीएम

Kukru Ecotourism: बैतूल/भैंसदेही। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर कुकरू गांव एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 और 28 जून को कुकरू गांव के दो दिवसीय विशेष दौरे पर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री अपने इस प्रवास के दौरान न केवल इस खूबसूरत हिल स्टेशन के विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे, बल्कि यहां के प्रसिद्ध सनसेट पॉइंट से ढलते सूरज का दीदार भी करेंगे। इसके साथ ही अगले दिन अलसुबह वे कुकरू के विहंगम सनराइज और बुच पॉइंट पर योग एवं गहरे ध्यान (मेडिटेशन) सत्र में भाग लेंगे। रविवार, 28 जून को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री इसी सुरम्य वादियों के बीच स्थानीय जनजातीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री के लोकप्रिय ‘मन की बात’ कार्यक्रम को भी सुनेंगे।

Mp:सतपुड़ा की वादियों में बसा 'कुकरू' बनेगा मध्यप्रदेश का नया पर्यटन  केंद्र, जानिए क्यों खास है यह हिल स्टेशन - Mp: 'kukru', Nestled In The  Satpura Ranges, Is Set To ...

मानसून में बादलों की छांव और फूलों की घाटी का अहसास

समुद्र तल से लगभग 1,117 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुकरू गांव अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति और प्रकृति के अद्भुत नजारों के लिए विख्यात है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां मानसून और सर्दियों के मौसम में देश के बड़े हिल स्टेशनों जैसा अहसास होता है। जून के इस मानसूनी सीजन में पूरा इलाका घने कोहरे और अपेक्षाकृत बेहद नीचे आ चुके बादलों से घिर जाता है। पहली बौछार के बाद पूरी कुकरू घाटी रंग-बिरंगे प्राकृतिक फूलों की चादर से ढंक जाती है, जो पर्यटकों के लिए अप्रतिम सनराइज और सनसेट का दृश्य पेश करती है। मुख्यमंत्री के इस दौरे से क्षेत्र में ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।Kukru Sunset Point in Khamla,Betul - Best Tourist Attraction near me in  Betul - Justdial

मध्य प्रदेश का एकमात्र ‘कॉफी हब’ है कुकरू, 1944 से जुड़ा है इतिहास

कुकरू गांव का ऐतिहासिक और कृषि महत्व भी बेहद अनूठा है। यह संपूर्ण मध्य प्रदेश का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां व्यावसायिक रूप से कॉफी की पैदावार की जाती है। इस अनोखी परंपरा की शुरुआत वर्ष 1944 में विदेशी मूल की महिला मिस फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने यहां कॉफी रोपण करके की थी, जो आज इस क्षेत्र की मुख्य पहचान बन चुकी है। कुकरू की वादियों में बेहद उच्च गुणवत्ता वाली ‘अरेबिका’ (Arabica) किस्म की कॉफी उगाई जाती है और वर्तमान में यहां प्रतिवर्ष लगभग 10 क्विंटल कॉफी का उत्पादन सफलतापूर्ण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री इस ऐतिहासिक रोपण क्षेत्र का भी बारीकी से निरीक्षण करेंगे।Beautiful sunset colours....Bharmour Himachal Pradesh Nov 3rd 2021

‘कुकरू ब्रांड’ से कोदो-कुटकी और डेयरी उत्पादों को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

राज्य सरकार अब कुकरू को सिर्फ एक पर्यटन स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। कॉफी के अलावा यह क्षेत्र स्थानीय स्तर पर उत्पादित पोषक अनाज कोदो-कुटकी, पारंपरिक रबड़ी, मावा और अन्य शुद्ध डेयरी उत्पादों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। जिला प्रशासन और मप्र सरकार संयुक्त रूप से इन उत्पादों को ‘कुकरू ब्रांड’ के नाम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर री-लॉन्च करने की वृहद् योजना पर काम कर रहे हैं। इस कदम से सतपुड़ा अंचल के स्थानीय आदिवासियों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र की सीमा से लगे इस जनजातीय क्षेत्र को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान हासिल होगी।

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