CG NEWS : रायगढ़ के तमनार में फिर मचेगा ‘औद्योगिक कोहराम’, शांभवी इस्पात के विस्तार पर जनसुनवाई या जनता से छल?

Sanjay Sahu
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CG NEWS : गौरीशंकर गुप्ता/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार औद्योगिक क्षेत्र में शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट विस्तार प्रस्ताव ने स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है। पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे आदिवासी बहुल इलाके में प्रस्तावित 1.2 MTPA क्षमता वाले स्पंज आयरन प्लांट विस्तार को लेकर जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ग्रामीण इसे प्रशासनिक छलावा बता रहे हैं।

CG NEWS : विस्तार योजना का विवरण

कंपनी द्वारा प्रस्तुत पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) रिपोर्ट के अनुसार, विस्तार में दो नई रोटरी किल्न, 25 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट, वेस्ट रिसाइक्लिंग यूनिट व हरित पट्टी शामिल है। उत्पादन क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य है। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) ने 20 अप्रैल को जनसुनवाई की तारीख तय की है। कंपनी का दावा है कि इससे 500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे व उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली लगाई जाएगी।

ग्रामीणों का विरोध

स्थानीय पंचायतों ने संयुक्त बयान जारी कर जनसुनवाई का बहिष्कार करने का ऐलान किया। ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित हो चुका है। आदिवासी महिला नेता सुनीता मरकम ने कहा, “पहले ही प्लांट से कोयला धुआं, फ्लाई ऐश व जल प्रदूषण से फसलें बर्बाद हो रही हैं। किडनी, श्वास रोग बढ़े हैं। विस्तार से ‘औद्योगिक कोहराम’ मचेगा।” पिछले पांच वर्षों में 300 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं। ग्रामीण NGT में अपील की तैयारी कर रहे हैं।

प्रशासन व कंपनी का पक्ष

कलेक्टर ने शांतिपूर्ण सहभागिता का आह्वान किया। एसडीएम ने जागरूकता सभाएं आयोजित कीं। कंपनी प्रबंधन ने ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ व एयर पॉल्यूशन कंट्रोल उपकरण लगाने का वादा किया। हालांकि, ग्रामीण पुरानी शिकायतों का हवाला देकर संदेह जता रहे। तमनार पहले से JINDAL, ISPAT जैसे प्लांट्स से प्रदूषित है, जहां AQI अक्सर 300 पार हो जाता।

CG NEWS : पर्यावरणीय चिंताएं

CG NEWS : विस्तार से सालाना 1.5 लाख टन कोयला जलने का अनुमान। फ्लाई ऐश डिस्पोजल के लिए नई लैंडफिल साइट चिन्हित। ग्रामीण भूजल स्तर गिरने व वन कटाई की आशंका से चिंतित। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि EIA में स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य हो। यह मामला छत्तीसगढ़ के खनिज समृद्ध क्षेत्रों में विकास बनाम पर्यावरण बहस को तीखा कर रहा।

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